Postpone JEE Neet

कल मेरे एक मित्र ने बताया कि उसका कोई मित्र है जो कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। अब वह तनाव में है क्योंकि उसका सितंबर में जेईई मैंस का पेपर है। वो क्वारंटइन है तो वो एग्जाम कैसे से पाएगा? ये केवल उसी की नहीं बल्कि अनेकों छात्रों की समस्या है। 

कोरोना के कारण जहां रोज हजारों मरीज मिल रहे है, कई सौ लोग रोज अपनी जान गवां रहे है, वही ऐसे समय में सरकार नीट-जेईई की परीक्षाएं आयोजित कराने का प्रयास कर रही है। इस समय पूरे भारत मे लॉकडाउन चल रहा है, रेल सेवा पूरी तरह से ठप पड़ी है, तो अभ्यार्थी 150-300 किमी दूर परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंचेंगे। केवल यही समस्या नहीं बल्कि और भी बहुत सी समस्याएं इस समय देश में चल रही है।

मेरे विचार से ये परीक्षाएं कम से कम दो महीनों के लिए रद्द कर दी जाए जिसके कुछ कारण अग्रलिखित है-

  • पूरे भारत में इस समय लॉकडाउन की स्थिति चल रही है। रेल सेवाएं , बस सेवाएं पूरी तरह ठप है तो अभ्यार्थी परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंचेंगे?
  • बहुत से अभ्यार्थी ऐसे है जिनके शहर में परीक्षा केंद्र की सुविधा ही नहीं है, जोकि सीधे सीधे सरकार की गलती है। ऐसे अभ्यार्थी दूसरे शहर में परीक्षा देने जाएंगे। क्या ऐसे में संक्रमण की आशंका नहीं है? सरकार की गलतियों की सजा अभ्यर्थियों को क्यों?
  • बहुत से छात्र गरीब परिवार से संबंधित है। जो कि दूसरे शहरों में जाने के लिए निजी वाहनों का इंतजाम नहीं कर सकते उनका क्या? क्या गरीब बच्चो को शिक्षा का अधिकार नहीं है? ये सरकार की विफलता है कि वो छात्र परीक्षा केंद्र तक भी नहीं पहुंच सकते।
  • बिहार-ओडिशा समेत देश के कई हिस्सों में बाढ़ का प्रकोप है। उनके घर, समान आदि खराब हो गया है जिसके कारण वे पहले ही तनाव में है। हालांकि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है लेकिन उन छात्रों का क्या जिनकी परीक्षा इस वजह से छूट जाएगी। यदि वो परीक्षा देंगे भी तो क्या सरकार को लगता है कि वो मानसिक रूप से तनाव रहित परीक्षा दे सकेंगे।
  • कोरोना के रोज 70 हजार के करीब मरीज मिल रहे हैं और हजारों लोगों की मौत रोज हो रही है। यदि किसी अभ्यार्थी को कोरोना हुआ और वो परीक्षा देने पहुंच गया तो वो कितनो को संक्रमित कर सकता है। 
  • परीक्षा देने जो छात्र दूसरे शहर जाएंगे , यदि जाते समय रास्ते में वो संक्रमित हो गए तो फिर क्या होगा क्या ये सरकार ने सोचा?
  • जेईई-नीट में बैठने वाले अधिकांश छात्र कम उम्र के होते है जिनके साथ अभिभावकों को परीक्षा केंद्र तक जाना पड़ता है। उन अभिभावकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
यदि सरकार गारंटी दे कि इन छात्रों को कुछ नहीं होगा, और यदि कुछ हुआ तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी तो भी अभिभावक अपने बच्चों को मौत के मुंह में क्यों भेजेंगे?
ये बात शत प्रतिशत सच है कि इस तरह के आयोजनों में सरकार और प्रशासन हमेशा विफल रहा है। ऐसे में प्रशासन की व्यवस्था के भरोसे अपने बच्चों को परीक्षा के लिए भेजना सबसे बड़ी बेवकूफी होगी। मरने से अच्छा है कि बच्चे अपने घर रहे। आप अगले वर्ष परीक्षा दे सकते है लेकिन आपको ये पता चल जाएगा कि सरकार छात्रों के भविष्य के विषय में क्या सोचती है। वर्तमान सरकार ही नहीं अपितु पिछली सरकारें भी कभी छात्र हित में नहीं सोच सकी । अब युवाओं को खुद सोचना होगा कि उनका नेता कैसा हो? छात्रों के हित में कभी किसी सरकार ने सोचा ही नहीं और न सोचेगी। यही कारण हैं कि भारत के छात्र विदेशो में रहना और पढ़ाई करना अधिक पसंद करते है। भारत के पास बेहतरीन विद्वान होते हुए भी भारत पीछे है।
आप खुद अपने बारे में सोचे, कोई नहीं है आपकी सुनने वाला। यदि कल आपको कुछ हुआ या आपकी वजह से किसी को कुछ हुआ तो ये लोग अपनी गलती नहीं निकलेंगे, बल्कि आप ही की गलती निकलेंगे।